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28 साल, 50 हजार किलोमीटर, 30 देश... मां से मिलने की जिद में पूरी दुनिया पैदल नाप दी, अब 'घर' पहुंचे; Photos

28 साल तक पैदल चलकर 30 देशों और चार महाद्वीपों का सफर तय करने वाले ब्रिटिश एडवेंचरर कार्ल बुशबी आखिरकार अपने घर इंग्लैंड पहुंच गए। मां से मिलने के लिए 1998 में शुरू हुआ उनका यह सफर करीब 50 हजार किलोमीटर लंबा रहा।

Written By: Khushbu Rawal
Published : Nov 02, 2026 07:23 pm IST,  Updated : Nov 02, 2026 07:23 pm IST
कहते हैं कि अगर इंसान कुछ ठान ले तो दुनिया की कोई भी मुश्किल उसे मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। ब्रिटेन के रहने वाले 57 वर्षीय कार्ल बुशबी ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है। मां से मिलने के लिए पैदल दुनिया का सफर शुरू करने वाले कार्ल ने आखिरकार 28 साल बाद अपनी ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर ली है।
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कहते हैं कि अगर इंसान कुछ ठान ले तो दुनिया की कोई भी मुश्किल उसे मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। ब्रिटेन के रहने वाले 57 वर्षीय कार्ल बुशबी ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है। मां से मिलने के लिए पैदल दुनिया का सफर शुरू करने वाले कार्ल ने आखिरकार 28 साल बाद अपनी ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर ली है।
करीब 50 हजार किलोमीटर का सफर तय करने के बाद 2 नवंबर 2026 को वह अपने गृहनगर हल (Hull), इंग्लैंड पहुंच गए। हालांकि, जिस घर तक पहुंचने का सपना लेकर उन्होंने यह सफर शुरू किया था, वहां लौटने के बाद अब उन्हें एक नई चिंता सता रही है। यह चिंता है सामान्य जिंदगी में वापस लौटने की।
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करीब 50 हजार किलोमीटर का सफर तय करने के बाद 2 नवंबर 2026 को वह अपने गृहनगर हल (Hull), इंग्लैंड पहुंच गए। हालांकि, जिस घर तक पहुंचने का सपना लेकर उन्होंने यह सफर शुरू किया था, वहां लौटने के बाद अब उन्हें एक नई चिंता सता रही है। यह चिंता है सामान्य जिंदगी में वापस लौटने की।
कार्ल बुशबी पूर्व ब्रिटिश पैराट्रूपर हैं। उन्होंने 1 नवंबर 1998 को दक्षिण अमेरिका के सबसे दक्षिणी हिस्से से अपनी यात्रा शुरू की थी। उस वक्त उनकी उम्र 30 साल से भी कम थी। उन्होंने अपने इस अभियान को 'गोलियथ एक्सपेडिशन' नाम दिया था।
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कार्ल बुशबी पूर्व ब्रिटिश पैराट्रूपर हैं। उन्होंने 1 नवंबर 1998 को दक्षिण अमेरिका के सबसे दक्षिणी हिस्से से अपनी यात्रा शुरू की थी। उस वक्त उनकी उम्र 30 साल से भी कम थी। उन्होंने अपने इस अभियान को 'गोलियथ एक्सपेडिशन' नाम दिया था।
2 नवंबर 2026 को इंग्लैंड के हल (Hull) में एक आम नागरिक के हाथ में पानी की एक बोतल है जिस पर ब्रिटिश साहसी कार्ल बुशबी के हस्ताक्षर हैं। कार्ल बुशबी दुनिया भर में पैदल यात्रा करने के अपने 28 साल लंबे सफर के बाद अब अपनी माँ के घर वापस लौट रहे हैं।
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2 नवंबर 2026 को इंग्लैंड के हल (Hull) में एक आम नागरिक के हाथ में पानी की एक बोतल है जिस पर ब्रिटिश साहसी कार्ल बुशबी के हस्ताक्षर हैं। कार्ल बुशबी दुनिया भर में पैदल यात्रा करने के अपने 28 साल लंबे सफर के बाद अब अपनी माँ के घर वापस लौट रहे हैं।
शुरुआत में उनका अनुमान था कि वह करीब 12 साल में पैदल चलते हुए अपने घर पहुंच जाएंगे, लेकिन रास्ते में आने वाली चुनौतियों और अलग-अलग परिस्थितियों के चलते यह सफर 12 साल के बजाय 28 साल तक खिंच गया।
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शुरुआत में उनका अनुमान था कि वह करीब 12 साल में पैदल चलते हुए अपने घर पहुंच जाएंगे, लेकिन रास्ते में आने वाली चुनौतियों और अलग-अलग परिस्थितियों के चलते यह सफर 12 साल के बजाय 28 साल तक खिंच गया।
कार्ल ने अपने इस असाधारण अभियान के दौरान करीब 31 हजार मील यानी लगभग 50 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान वह चार महाद्वीपों और 30 देशों से होकर गुजरे। उनके लिए यह सिर्फ लंबी दूरी तय करने का अभियान नहीं था, बल्कि हर कदम पर उनकी हिम्मत और संकल्प की परीक्षा भी थी।
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कार्ल ने अपने इस असाधारण अभियान के दौरान करीब 31 हजार मील यानी लगभग 50 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान वह चार महाद्वीपों और 30 देशों से होकर गुजरे। उनके लिए यह सिर्फ लंबी दूरी तय करने का अभियान नहीं था, बल्कि हर कदम पर उनकी हिम्मत और संकल्प की परीक्षा भी थी।
कार्ल बुशबी ने चिली से अपनी यात्रा शुरू करते समय दो सख्त शर्तें रखी थीं। पहली, वह अपने अभियान के दौरान किसी भी तरह के वाहन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। दूसरी, वह तब तक घर वापस नहीं लौटेंगे, जब तक अपने पैरों से चलते हुए वहां नहीं पहुंच जाते। इन्हीं शर्तों के साथ शुरू हुआ उनका अभियान 28 साल बाद पूरा हुआ।
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कार्ल बुशबी ने चिली से अपनी यात्रा शुरू करते समय दो सख्त शर्तें रखी थीं। पहली, वह अपने अभियान के दौरान किसी भी तरह के वाहन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। दूसरी, वह तब तक घर वापस नहीं लौटेंगे, जब तक अपने पैरों से चलते हुए वहां नहीं पहुंच जाते। इन्हीं शर्तों के साथ शुरू हुआ उनका अभियान 28 साल बाद पूरा हुआ।
करीब तीन दशक तक सड़क, पहाड़, जंगल, समुद्र और अनजान देशों के बीच जिंदगी बिताने के बाद अब कार्ल अपने घर लौट आए हैं। लेकिन इस लंबी यात्रा ने उनकी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा सफर में ही गुजार दिया।
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करीब तीन दशक तक सड़क, पहाड़, जंगल, समुद्र और अनजान देशों के बीच जिंदगी बिताने के बाद अब कार्ल अपने घर लौट आए हैं। लेकिन इस लंबी यात्रा ने उनकी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा सफर में ही गुजार दिया।
'गोलियथ एक्सपेडिशन' के नाम से जानी जाने वाली बुशबी की यह यात्रा, मानव इतिहास की सबसे लंबी निरंतर पैदल यात्राओं में से एक मानी जाती है। अपनी मां के घर वापस लौटना उनके एक कड़े व्यक्तिगत संकल्प के पूरा होने का प्रतीक है।
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'गोलियथ एक्सपेडिशन' के नाम से जानी जाने वाली बुशबी की यह यात्रा, मानव इतिहास की सबसे लंबी निरंतर पैदल यात्राओं में से एक मानी जाती है। अपनी मां के घर वापस लौटना उनके एक कड़े व्यक्तिगत संकल्प के पूरा होने का प्रतीक है।
जिस मां से मिलने के लिए उन्होंने यह असाधारण यात्रा शुरू की थी, अब आखिरकार वह उनके पास पहुंच रहे हैं। 28 साल का इंतजार, हजारों किलोमीटर का सफर और अनगिनत मुश्किलों को पार करने के बाद कार्ल की मंजिल तो पूरी हो गई, लेकिन अब उनके सामने जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू करने की चुनौती है।
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जिस मां से मिलने के लिए उन्होंने यह असाधारण यात्रा शुरू की थी, अब आखिरकार वह उनके पास पहुंच रहे हैं। 28 साल का इंतजार, हजारों किलोमीटर का सफर और अनगिनत मुश्किलों को पार करने के बाद कार्ल की मंजिल तो पूरी हो गई, लेकिन अब उनके सामने जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू करने की चुनौती है।
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